Gurugram कोर्ट परिसर की गंदगी पर Court सख्त: PWD, MCG और GMDA को नोटिस जारी कर एक्शन प्लान मांगा
बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने न्यायालय में अपनी बात रखते हुए कहा कि अदालतों को 'न्याय का मंदिर' कहा जाता है, लेकिन प्रतिवादी अधिकारियों के सुस्त रवैये और खराब प्रबंधन के कारण, यह परिसर हजारों कर्मियों के लिए एक अस्वच्छ, गंदा, बदबूदार और बीमारी फैलाने वाला स्थान बन गया है।

Gurugram कोर्ट परिसर में व्याप्त घोर अव्यवस्था, खराब नागरिक सुविधाओं और आवारा पशुओं के बढ़ते आतंक के मामले में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) मनीष कुमार की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है।
कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA), नगर निगम गुरुग्राम (MCG), लोक निर्माण विभाग (PWD) और जिला प्रशासन को नोटिस जारी किया है। इन सभी विभागों को एक निश्चित समय सीमा के साथ इन समस्याओं को ठीक करने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना (Action Plan) अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
गुरुग्राम जिला बार एसोसिएशन ने कोर्ट में एक याचिका दायर कर अधिकारियों पर बार-बार की शिकायतों के बावजूद समस्याओं का समाधान न करने का गंभीर आरोप लगाया है। एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा है कि जिस परिसर का उपयोग प्रतिदिन हजारों न्यायिक अधिकारियों, वकीलों, पुलिसकर्मियों और वादियों द्वारा किया जाता है, उसकी स्थिति बेहद दयनीय है।
याचिका में खराब जल निकासी (ड्रेनेज), दोषपूर्ण सीवरेज, अपर्याप्त स्वच्छता, और टूटी-फूटी आंतरिक सड़कों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।

परिसर में फैली गंदगी, दुर्गंध और मच्छरों के प्रजनन स्थलों के कारण यहां अस्वच्छ और असहनीय स्थिति बनी हुई है।
आरोप लगाया गया है कि आवारा पशुओं (कुत्तों और बंदरों) के कुप्रबंधन ने कोर्ट परिसर में भारी उपद्रव पैदा कर दिया है।
बार एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने न्यायालय में अपनी बात रखते हुए कहा कि अदालतों को ‘न्याय का मंदिर’ कहा जाता है, लेकिन प्रतिवादी अधिकारियों के सुस्त रवैये और खराब प्रबंधन के कारण, यह परिसर हजारों कर्मियों के लिए एक अस्वच्छ, गंदा, बदबूदार और बीमारी फैलाने वाला स्थान बन गया है।
याचिका में अधिकारियों की इस स्थिति को पूरी तरह विफलता बताया गया है। श्री शांडिल्य के अनुसार, नागरिक बुनियादी ढांचे की जिम्मेदारी PWD की है, साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की, और GMDA परिसर के बाहरी बुनियादी ढांचे के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसियां ‘दोषारोपण के खेल’ में लगी हुई हैं और कोई भी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

याचिका में इस बात पर भी जोर दिया गया कि गुरुग्राम राज्य का सर्वाधिक राजस्व देने वाला जिला है और यहां शीर्ष राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों के कॉर्पोरेट कार्यालय हैं। इन कंपनियों के शीर्ष अधिकारी और विदेशी नागरिक भी मुकदमों के सिलसिले में कोर्ट कॉम्प्लेक्स आते हैं। ऐसी बदहाल स्थिति से इन महत्वपूर्ण आगंतुकों पर गुरुग्राम की छवि का कैसा असर पड़ता होगा, इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
कोर्ट ने अब सभी संबंधित विभागों को इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान तलाशने और समयबद्ध योजना के साथ जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।












